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शहीदों की शहादत -विपिन बकलोल

कभी आपने शहीदों की शहादत के बाद उनके घर पर हो रही मिडिया कवरेज को गौर से देखा है ? क्या आपने नोटिस किया कि घर के कोने में खड़ी चारपाई कितनी पुरानी हो चुकी है, क्या आपने ये जानने की कोशिश की जो शख्स देश की खातिर मिट्टी में लीन होने जा रहा है उसके घर की दीवार ना जाने कबसे पेंट भी नहीं हुई है क्योंकि की कई जवानों के घर तो मिटटी के ही दीखते हैं,  हाँ उन दीवारों पर किये गए वादे जरुर दिख जाते हैं जो उस जवान ने किया था कि कुछ और साल में ये दीवारें ये मिटटी से ईंट की हो जाएँगी | कभी ध्यान दिया है उन रोते बिलखते बच्चों पर जो उन सपनों को लेकर रो रहे होते हैं जो उनके पापा ने अगली छुट्टी में आकर पूरा करने का वादा कर गये थे, गौर से देखिएगा उन बच्चों के कपड़ों को वो किसी शोपिंग माल से ख़रीदे नहीं लगते हैं, ना ही किसी बड़ी मॉडर्न फैशन की दूकान से, ये उन्ही दुकानों के लगते हैं जहाँ पर इस बात पर उधार मिल जाता है कि 'बेटा छुट्टी पर आएगा तो चुका देंगे' । कभी कैमरे के उस नज़र पर गौर कीजियेगा जो वो देखना और दिखाना नहीं चाहता है,  जरा उस विधवा के तरफ ध्यान दीजियेगा जिसको इससे फर्क नहीं पड़ता कि उसे...

कानपुर पेज से दो लाख कनपुरियो और भारतीयों के जुड़ने की बधाई !

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ख़ुशी -बकलोल विपिन

अच्छा मुझे ये देखकर आजकल बहुत ख़ुशी होती है की सोशल मीडिया पे लोग आजकल अपने अपने प्रान्त की लोकल भाषा का बहुत कायदे से प्रयोग कर रहे हैं । और सबसे बड़ी बात की अब उन्हें इस बात की बिलकुल भी शर्म महसूस नहीं होती । ये देश की पहचान और प्रगति के लिए बहुत अच्छी बात है। # हिंदी_भाषा_का_जादा_से_जादा_प्रयोग # बकlol_विपिन # कानपूर_पेज_टीम

तुम्हे पता तो होगा प्रीती

(कविता ज़रा लम्बी है, लेकिन आग्रह है, कि यदि पढ़ें, तो अंतिम पंक्ति तक पढ़ें) तुम्हें पता तो होगा प्रीती! इसी महीने की सोलह का कार्ड मिला तो होगा प्रीती तुम्हें पता तो होगा प्रीती! मुझसे पहले ये खुशखबरी तुम तक तो पहुंची ही होगी चाहे कोई दे या ना दे खबर किसी से ली ही होगी वही पुराना स्टाइल तुम्हारा 'बोलो ना, बतलाओ ना, कसम है तुमको मेरे सर की सच्ची में, बतलाओ ना' अच्छा, ये सब छोडो! तुमसे और बहुत कुछ बतलाना था पिछले साढ़े तीन साल का किस्सा भी तो दुहराना था जब से तुम यूँ गई छोड़ कर यही सोचकर सदमे में था बड़ी बेवफा निकली प्रीती मैं भी किसके धोखे में था? अलगे कुछ हफ़्तों तक बिलकुल खाना पीना भूल गया मैं उलटी-सीधी हरकत कर के दिन भर हँसना भूल गया मैं कुछ यूँ ही दिन गुज़र रहे थे इक दिन माँ कमरे में आई मेरे सर पर हाथ फेर कर मुझको इक तस्वीर दिखाई आधे मन से देखा उसको नीचे नाम लिखा था - स्वाती नज़र पड़ी सीधे गलती पर यहाँ भी 'त' पर वही बड़ी 'ई' याद है कितना लडती थी तुम "गलत नहीं है, यही सही है बचपन से ही यही लिखा है तुम्हें तो कुछ भी पता नह...

प्यार

प्यार ! एक मीठा सा दर्द है, और ये दर्द तब बढ़ जाता है जब आपका प्यार आपको नजरअंदाज़ करने लगे । आप जानते हो की वो आपसे प्यार नहीं करता पर फिर भी ये सोचना की शायद कभी किसी दिन उसका मन पिघलेगा शायद कभी किसी दिन उसको भी आपसे प्यार हो जायेगा, शायद किसी दिन............... ये जो आपके और उसके बीच में "शायद" है न, बस यही आपके प्यार का वजूद है । आपका आज भी यही "शायद" है और शायद कल भी । हर सुबह सबसे पहले "गुड मॉर्निंग" और हर रात सोने से पहले "गुड नाईट" का जो मैसेज करते हो आप और हर दस मिनट   में फोन निकाल के चेक करते हो की जवाब आया की नहीं । ये जो हर दस मिनट का सब्र है न, बस यही है आपके प्यार का सबूत जो आपके अलावा किसी को नहीं दीखता । यहाँ तक की उसको भी नहीं । दिन में घर से निकलते हुए एक बार उसका मुस्काता चेहरा देखने भर से आप सोचते हो की आज दिन बहुत अच्छा गुजरेगा। और अगर शाम को घर लौटते वक़्त भी झलक मिल जाये तो रात को सुकून। ये जो आपकी गलतफहेमी है, बस यही है आपकी रोजाना की चाँद खुशियो का कारण । जब आपके मित्र उसके बारे में कोई मजाक या अभद्र टिप्पणी करते है...